Demonetisation Verdict: 'गैरकानूनी थी नोटबंदी', जानें फैसले से असहमत न्यायमूर्ति नागरत्ना ने क्या कहा

 
Demonetisation Verdict: 'Demonetisation was illegal', know what Justice Nagaratna said while disagreeing with the verdict
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने कहा कि नोटबंदी संसद में कानून बनाकर करनी चाहिए थी। जज ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र की बात मानने के लिए RBI ने 24 घंटों में नोटबंदी के फैसले को हरी झंडी दी।

Demonetization Verdict:  मोदी सरकार द्वारा 2016 में लिए गए नोटबंदी के फैसले को आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Verdict on Notebandi) द्वारा क्लीन चिट मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार ने आरबीआई से गहन चर्चा के बाद ही यह फैसला लिया है। इस बीच पांच जजों की पीठ द्वारा सुनाए गए इस फैसले में एक जज ने असहमति जताई है। न्यायमूर्ति बी वी नागरथना ने नोटबंदी को गैरकानूनी बताया।

नोटबंदी पर असहमति का फैसला सुनाने वाले उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति बी वी नागरथना ने कहा कि 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों की पूरी शृंखला को एक कानून के जरिए खत्म किया जाना चाहिए न कि एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से। जज ने कहा कि संसद को इतने महत्वपूर्ण महत्व के मामले में अलग नहीं छोड़ा जा सकता है।

Demonetisation Verdict: 'Demonetisation was illegal', know what Justice Nagaratna said while disagreeing with the verdict

न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि केंद्र द्वारा नोटों की एक पूरी श्रृंखला का विमुद्रीकरण करना कहीं अधिक गंभीर मुद्दा है जिसके देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर व्यापक असर हुए हैं। जज ने यह भी कहा कि इस फैसले से ऐसा लगता है कि RBI ने जल्दबाजी में केवल सरकार का फैसला मानने के लिए 24 घंटों में नोटबंदी को हरी झंड़ी दी हो।

न्यायाधीश ने कहा कि प्रस्ताव केंद्र से आया था जबकि आरबीआई की राय मांगी गई थी और केंद्रीय बैंक द्वारा दी गई ऐसी राय को आरबीआई अधिनियम की धारा 26 (2) के तहत 'सिफारिश' के रूप में नहीं माना जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि संसद लोकतंत्र का आधार है और इसके बिना, लोकतंत्र पनप नहीं सकता। फैसले का जिक्र करते हुए जज ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले में संसद को अलग नहीं किया जा सकता।

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को सही बताते हुए 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। कोर्ट ने सरकार के नोटबंदी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण नहीं थी। शीर्ष अदालत ने इसी के साथ नोटबंदी को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

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नोटबंदी के बाद विभिन्न लोगों या पक्षों की ओर से नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं, जिनमें तर्क दिया गया कि यह सरकार का सोचा-समझा निर्णय नहीं था और अदालत की ओर से इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए। इस तरह के फैसलों को दोहराया न जा सके, इसके लिए भी याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से नियम बनाने की मांग की।

आज यानी कि 2 जनवरी से पहले सुप्रीम कोर्ट ने 7 दिसंबर को केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को नोटबंदी के फैसले से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति एसए नजीर की अध्यक्षता वाली 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में अपने शीतकालीन अवकाश से पहले दलीलें सुनीं थीं और 7 दिसंबर को फैसले को स्थगित कर दिया था।

केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि अदालत तब तक किसी मामले का फैसला नहीं कर सकती है जब तक कोई ठोस राहत नहीं दी गई हो। केंद्र ने कहा कि यह "घड़ी की सुइयों को पीछे करने" या "तले हुए अंडे को खोलना" जैसा होगा।

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केंद्र सरकार ने कहा कि नोटबंदी एक "सोचा समझा" निर्णय था और नकली नोटों, टेरर फंडिंग, काले धन और टैक्स चोरी के खतरे से निपटने के लिए एक बड़ी रणनीति का हिस्सा था।

आज याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की जिस बेंच ने फैसला सुनाया है, उसमें न्यायमूर्ति एसए नजीर के अलावा अन्य सदस्य जैसे कि जस्टिस बीआर गवई, बीवी नागरत्ना, एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन शामिल हैं। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने दो अलग-अलग फैसले लिखे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने तर्क दिया कि BJP की सरकार ने नकली नोटों या काले धन को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक तरीकों की जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार अपने दम पर कानूनी निविदा पर कोई प्रस्ताव शुरू नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा, ''यह केवल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर ही किया जा सकता है।''

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चिदंबरम ने तर्क दिया कि केंद्र निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को रोक रहा था, जिनमें 7 नवंबर को रिजर्व बैंक को लिखा गया पत्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड की मीटिंग की डिटेल शामिल थी।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वकील ने अदालत में जब तर्क यह दिया कि न्यायिक समीक्षा आर्थिक नीति के फैसलों पर लागू नहीं हो सकती है तो अदालत ने कहा कि न्यायपालिका हाथ जोड़कर बैठ नहीं सकती है क्योंकि यह एक आर्थिक नीति से जुड़ा फैसला है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने यह स्वीकार किया कि कुछ "अस्थायी दिक्कतें" थीं जो राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हैं। बैंक ने अपने सबमिशन में कहा कि उन दिक्कतों का एक सिस्टम के तहत निदान किया गया।

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विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी सरकार की नाकामी थी, जिससे कारोबार तबाह हुआ और नौकरियां खत्म हो गईं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "BJP सरकार जिसे 'मास्टरस्ट्रोक' बता रही थी, उसके छह साल बाद जनता के पास उपलब्ध नकदी 2016 की तुलना में 72% अधिक है। पीएम (नरेंद्र मोदी) ने अभी तक इस बड़ी विफलता को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था में गिरावट आई।"