Akhilesh Yadav: शिवपाल के यूटर्न और आशुतोष मौर्य के बगावती तेवर के बाद अब अखिलेश क्या लेंगे फैसला?

 
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी को दो बड़े झटके लगे हैं। बदायूं सीट से सपा के प्रत्याशी शिवपाल यादव ने मैदान छोड़ने का एलान कर दिया है। जब से टिकट फाइनल हुआ था, तब से ही टिकट बदलने की चर्चा शुरू हो गई थी। उन्होंने खुद चुनाव से हटने का एलान किया, साथ ही बदायूं लोकसभा सीट से बेटे को उम्मीदवार बनाने का एलान किया।

हालांकि अभी तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उधर, सपा विधायक आशुतोष मौर्य के परिवार ने भी पाला बदल लिया है। उनकी पत्नी और बहन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। आशुतोष ने खुद बगावती रुख अपनाया हुआ है, ऐसे में बदायूं सीट पर समीकरण बदलेंगे।

दरअसल, सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को बड़ा एलान करते हुए सबको चौंका दिया। उन्होंने एलान किया कि उनकी जगह अब बदायूं लोकसभा सीट से उनके बेटे आदित्य यादव मैदान में होंगे। वह बहुत ही जल्दी नवरात्र में नामांकन करेंगे। नवरात्र में शुभ और अच्छा होता है।

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शिवपाल ने रविवार को बिसौली विधानसभा इलाके के अहमदगंज की चुनावी सभा में कहा कि यह चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। साथ ही आदित्य यादव का नाम लिए बगैर ही कहा, चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अब तो बन गए हैं... पता है, पता है, इसके बाद लोगों की ओर से नाम आया आदित्य यादव। 

आदित्य यादव जिंदाबाद के नारे भी लगे फिर शिवपाल सिंह यादव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा- देखिए, पहले तो लखनऊ से उनका ही नाम चला था। लेकिन खासतौर से युवाओं की मांग पर अब आदित्य यादव प्रत्याशी हो गए हैं। 

20 फरवरी को सपा मुखिया ने शिवपाल सिंह यादव को बदायूं लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया था। उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भी वह निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंचे थे, तब चर्चा चली थी कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते, शिवपाल सिंह यादव विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं।

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हालांकि 14 मार्च को शिवपाल सिंह बदायूं आए। बदायूं, सहसवान और गुन्नौर में हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में युवाओं ने शिवपाल सिंह को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव पारित किया। तब शिवपाल सिंह ने कहा था कि युवाओं की मांग पर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष से बातचीत करेंगे।

अब रविवार को उम्मीदवारी के मुद्दे पर उन्होंने खुद ही स्थिति स्पष्ट की है। हालांकि बदायूं के सपा के जिलाध्यक्ष आशीष यादव का कहना है कि अधिकृत तौर पर घोषणा राष्ट्रीय अध्यक्ष ही करेंगे। उधर, सपा विधायक आशुतोष मौर्य के अपनी ही पार्टी का साथ छोड़ने से बदायूं लोकसभा सीट पर समीकरण प्रभावित होना तय माना जा रहा है।

यहां से फिलहाल पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव सपा प्रत्याशी हैं। आशुतोष मौर्य ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। अब लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पत्नी बिल्सी नगर पालिका परिषद की पूर्व चेयरमैन सुषमा मौर्य और बहन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा भाजपा में शामिल हो गई हैं।

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फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में सपा के कुल सात विधायकों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। इनमें आशुतोष मौर्य के अलावा मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश सिंह, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और राकेश पांडेय शामिल हैं।

उसके बाद से ही भाजपा इन विधायकों पर अपनी नजर गढ़ाए हुए है। हालांकि, यह बात दीगर है कि दल-बदल कानून के कारण ये विधायक आधिकारिक तौर पर सपा छोड़ने की घोषणा नहीं कर रहे हैं। सपा ने भी उन्हें पार्टी से न निकालने का फैसला किया है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को पार्टी से निकालने पर उन्हें अभयदान मिल जाएगा, जोकि सपा नहीं चाहती है। वहीं, खास रणनीति के तहत उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आशुतोष मौर्य के परिवार को लखनऊ में भाजपा में शामिल करा दिया।

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बताते हैं कि आशुतोष मौर्य भी बदायूं में सपा के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। उनके तेवर पूरी तरह से बगावती हैं, लेकिन विधायकी जाने के डर से खुद सपा से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। आशुतोष मौर्य बदायूं लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बिसौली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे।

इस सीट पर यादव, मुस्लिम और मौर्य समीकरण प्रभावी माने जाते हैं। मौर्य-शाक्य मतदाताओं की संख्या दो लाख से ज्यादा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वहां से भाजपा के टिकट पर संघमित्रा मौर्य चुनाव जीती थीं।

इस बार भी भाजपा ने बदायूं से दुर्विजय सिंह शाक्य को चुनाव मैदान में उतारा है। जाहिर है कि आशुतोष मौर्य और उनके परिवार के भाजपा के पक्ष में जाने से मौर्य-शाक्य बिरादरी में भाजपा की स्थिति मजबूत होगी।

भाजपा की रणनीति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि संघमित्रा का टिकट कटने के बावजूद पार्टी ने उन्हें अपने साथ जोड़े रखा है। जबकि, संघमित्रा के पिता व पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार भाजपा के खिलाफ ताल ठोंके हुए है।