Varanasi News: 143 मकान हो चुके है जर्जर, नोटिस के बाद भी रह रहा है परिवार, कभी भी हो सकता है हादसा

 
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Varanasi News: विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के एक किलोमीटर परिक्षेत्र के दशाश्वमेध जोन में 143 जर्जर मकान हैं। ज्यादातर मकानों में लोग रहते हैं। त्रिपुरा भैरवी घाट के पास जर्जर भवन में लोग परिवार के साथ रह रहे हैं। यहां दीवारों में दरार के साथ पत्थर की पटिया टूट रही है।

लकड़ी के धरन में दीमक लग चुकी है। समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। नगर निगम के अनुसार वाराणसी में सबसे ज्यादा जर्जर भवन कोतवाली जोन में हैं। निगम ने इसके लिए अपना डाटा भी प्रस्तुत किया है।

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अंदेशा जताया है कि समय रहते इनक भवनों की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी हादसे ने इंकार नहीं किया जा सकता। दुर्गा घाट पर शाही नाले की सफाई के लिए आठ भवनों को खाली करने के लिए जलकल ने नोटिस भेजा है। ये भवन जर्जर हैं।

इसके साथ ही कमच्छा मेंं पब्लिक वेलफेयर अस्पताल भी जर्जर है। मदनपुरा में जर्जर मकानों के नीचे दुकानें हैं। यहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है। बारिश आने के बाद भी नगर निगम ने जर्जर भवनों को गिराने की दिशा में कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। 

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शहर में 404 जर्जर भवन हैं। नगर निगम के पांच जोन में सबसे ज्यादा जर्जर भवन कोतवाली जोन में है। कोतवाली जोन में 188, दशाश्वमेध में 143, आदमपुर में 19, भेलूपुर में 14 और वरुणा पार में 40 जर्जर भवन हैं। नगर निगम की ओर से इन सभी भवन स्वामियों को नोटिस दिया गया है। 

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद वाले मकानों में दोनों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने और उसे ध्वस्त कराने का आदेश देना पड़ता है। इसके बाद भी भवन नहीं गिराए जाते हैं, तो इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण कराया जाता है।

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जर्जर भवनों को ध्वस्त करने में नगर निगम के सामने कई कानूनी अड़चने भी हैं। कई बार भवन स्वामी और किराएदार कोर्ट की शरण में चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में भवन को गिराने में कानूनी अड़चन बाधा बनती है। ऐसे में कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ऐसे भवनों के ध्वस्तीकरण का काम करता है। तब तक हादसा न हो इसके लिए दोनों पक्ष को मकान खाली करने को कहा जाता है।

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